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रूस, जर्मनी और चीन की कूटनीति से धराशायी हुए अमेरिका सहित नाटो देश

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रूस, जर्मनी और चीन की कूटनीति से धराशायी हुए अमेरिका सहित नाटो देश  यूक्रेन पूर्ववर्ती सोवियत संघ रूस का हिस्सा था। रूस हमेशा कहता है कि यूक्रेन के लोग रूसी हैं और रूस यूक्रेन की भूमि और उसके लोग को खुद से अलग नहीं करना चाहता है। विक्टर यानुकोविच के यूक्रेन का राष्ट्रपति बनने के बाद रूस यूक्रेन में बहुत मजबूत हो गया था। ब्रिटेन और अमेरिका ने यूक्रेन में विरोध करवाकर विक्टर यानुकोविच को देश छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया था। जिसके बाद रूस ने यूक्रेन के प्रायद्वीप क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था और औद्योगिक शहर डोनबास में लंबे समय से यूक्रेन की सेना और अलगाववादियों में युद्ध चल रहा है। रूस अलगाववादियों को हथियार और धन उपलब्ध कराता है लेकिन कहता है कि वे रूसी स्वयंसेवक हैं, इस युद्ध में रूस अपनी भूमिका स्वीकार नहीं करता है। यूक्रेन नाटो देश का सदस्य बनने को उत्सुक रहता है जो कि रूस को नागवार लगता है क्योंकि रूस अपनी सीमा पर नाटो देश की सेना को नहीं देखना चाहता है। नाटो का गठन वर्ष 1949 में सोवियत संघ रूस की शक्ति का सामना करने के लिए ही हुआ था। वस्तुतः नाटो देश ने भरोसा दिलाया कि...

पुण्यभूमि पट्टी का राजनैतिक इतिहास

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पट्टी का राजनैतिक इतिहास राहुल पांडे 'अविचल'  स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में पट्टी ने खुद को अजर-अमर बनाया है। बाबा रामचंदर, झिंगुरी सिंह, भगवान दीन पटेल, करिया कुर्मी, श्याम सुंदर शुक्ल, मुनीश्वर दत्त उपाध्याय, राजेश्वर सहाय त्रिपाठी, राम राज शुक्ल की पावन धरती पट्टी  आकर स्वतंत्रता संग्राम के सुकुमार नायक पंडित जवाहर लाल नेहरू ने राजनीति का ककहरा सीखा था। रहठे से बने झौवे पर बैठकर उन्होंने अपने जीवन का ऐतिहासिक भाषण दिया था। लियाकत अली से वर्ष 1921 में प्रभावित होकर श्याम सुंदर शुक्ल ने दरोगा की नौकरी छोड़ दी थी और जनपद के कांग्रेस पार्टी के प्रथम अध्यक्ष बने थे। जब देश को दिनांक 15 अगस्त 1947 की रात्रि 12 बजे आजाद होना था तो श्याम सुंदर शुक्ल और मुनीश्वर दत्त उपाध्याय ने रात्रि 11 बजे ही कलेक्ट्रेड में लगे यूनियन जैक को फाड़कर फेंक दिया था। यूनाइटेड प्रोविन्स के बाद उत्तर प्रदेश बने राज्य में पट्टी विधानसभा का अस्तित्व वर्ष 1957 में आया। मगर यह शीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। वर्ष 1957 में बाबू रामकिंकर ने कांग्रेस पार्टी से प्रथम विधायक बनने का गौरव प्राप्त किया। वर्ष...

समाज और पार्टी में सामंजस्य को लेकर चर्चित हुए थे जय सिंह यादव

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समाज और पार्टी में सामंजस्य को लेकर चर्चित हुए थे जय सिंह यादव  राहुल पांडे 'अविचल'  बीरापुर/रानीगंज, प्रतापगढ़। जब सिद्धांत आपस में टकराने लगे तो सामंजस्य बिठाना बहुत कठिन होता है। मंडल आयोग की रिपोर्ट जब संसद में लागू हो रही थी तो उस समय राजीव गांधी ने उसका विरोध किया। राजीव गांधी पूरी रिपोर्ट को खारिज करना चाहते थे मगर यह कार्य सरल नहीं था। इसके बावजूद भी संसद में लगातार तीन घण्टे उन्होंने मंडल आयोग की रिपोर्ट के विरुद्ध बोला और सवर्णों के पक्ष में किसी भी नेता द्वारा संसद में बोला गया यह आजादी से लेकर अब तक का सबसे लंबा वक्तव्य है। राममंदिर आंदोलन ने सवर्णों के मन में राजीव गांधी के प्रति जो स्नेह उत्पन्न हुआ था उसे खत्म कर दिया था। उत्तर प्रदेश और बिहार में कई नेताओं का उदय हो गया। मुलायम सिंह, लालू प्रसाद और नितीश कुमार आदि मंडल आयोग की देन हैं। दिनांक 07 अगस्त 1990 को मंडल आयोग की सिफारिश संसद में लागू होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने विरोध यात्रा निकाली तो पिछड़ा वर्ग समुदाय ने स्वागत में यात्रा निकाली थी। वर्ष 1980 के लोकसभा चुनाव में लोकदल पार्टी से प्रतापगढ़ लोकसभा में द...

कैंची ने कुतर दिए थे सहानुभूति के वोट

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कैंची ने कुतर दिए थे सहानुभूति के वोट  राहुल पांडे 'अविचल'  विश्वनाथगंज। परिसीमन के बाद वर्ष 2012 में गड़वारा विधानसभा समाप्त हो गयी और विश्वनाथगंज विधानसभा शीट  अस्तित्व में आयी थी। आसपुर देवसरा से ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़कर राजनीति में कदम रखने वाले राजा राम पाण्डेय उत्तर प्रदेश विधानसभा में तीन बार प्रवेश किए। ब्लॉक प्रमुख का चुनाव लड़ने का निर्णय राजाराम पाण्डेय ने विलम्ब से लिया था। वह कोऑपरेटिव में अपना डेलीकेट नहीं बना पाए थे इसलिए कांग्रेस पार्टी के सभाजीत सिंह से चुनाव हार गए थे। वर्ष 1991 और 1993 का चुनाव समता पार्टी से रामपुर खास विधानसभा से लड़ा और प्रमोद तिवारी को टक्कर दिया। वर्ष 1996 का चुनाव राजाराम पाण्डेय ने गड़वारा विधानसभा क्षेत्र  से जनतादल से लड़ा और विजयी होकर विधानसभा में पहुंचे। जनतादल तोड़कर जनतादल (राजाराम) के नाम से पार्टी बनाया और कल्याण सिंह को समर्थन देकर पहली बार में ही उत्तर प्रदेश सरकार में खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री बन गये। वर्ष 2002 में लोकजनशक्ति पार्टी से दूसरी बार गड़वारा के विधायक बने और वर्ष 2004 में मुलायम सिंह को समर्थन दिया और खा...

मीरा जी और कृष्ण जी जैसा था लता जी और केएल सहगल जी का रिश्ता

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मीरा जी और कृष्ण जी जैसा था लता जी और केएल सहगल जी का रिश्ता  राहुल पांडे 'अविचल'  मीरा जी बहुत छोटी थीं तो उन्हें उनकी भाभी एक कहानी सुना रही थीं जिसमें मीरा जी की भाभी ने अपनी सखी के विवाह के विषय में बताया तो मीरा जी ने कहा कि मेरा दूल्हा कहाँ है? कहीं कहीं लिखा है कि गांव में बारात आयी थी तो मीरा जी ने कहा कि भाभी बाजा कहाँ बज रहा है तो भाभी ने कहा कि गांव में बारात आयी है, किसी का विवाह होने वाला है। मीरा जी ने पूँछा कि बारात क्या होती है तब भाभी ने कहा दूल्हा आता है एक लड़का और एक लड़की की शादी होती है, इससे पति-पत्नी का रिश्ता बनता है। तब मीरा जी ने कहा कि मुझे भी मेरे पति से मिलाइये भाभी। इसपर भाभी ने कहा कि जब तुम बड़ी हो जाओगी तब तुम्हारा विवाह होगा। मगर मीरा जी जिद करने लगीं तो भाभी ने पूजाघर में ले जाकर बताया कि यही आपके पति हैं। भगवान कृष्ण की प्रतिमा को देखकर मीरा जी ने उन्हें अपना पति मान लिया। जब मीरा जी बड़ी हुयीं तो उनका विवाह सिसोदिया वंश के कुल नायक मेवाड़ के महाराज भोजराज से हुआ जो कि महाराणा सांगा के पुत्र थे। मीरा जी अपने साथ भगवान कृष्ण की मूर्ति लेकर ससुराल...

का रहिमन हरि को घट्यो, जो भृगु मारी लात।

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इतिहास को बारीकी से पढ़ा जाए तो इतिहास में ब्राह्मणों को बहुत सम्मान मिला जबकि ब्राह्मणों ने कई जगह इतिहास के साथ क्रूर मजाक किया था। आज जिसे हम हिंदुओ का सबसे बड़ा आदर्श मानते हैं, ब्राह्मणों ने उनके साथ भी घिनौना कार्य किया था। मगर दूसरे अर्थों में देखा जाए तो उन्होंने फिर भी ब्राह्मणों का सम्मान किया। कभी किसी ब्राह्मण का अपमान नहीं किया। सबको साथ लेकर चलना बस उनके ही बस में था।   जब वीर शिवाजी का राज्याभिषेक होना था तो कोई भी ब्राह्मण राज्याभिषेक के लिए तैयार नहीं हुआ। मगर वीर शिवाजी ने कहा कि वह ब्राह्मण के हाथ से ही राज्याभिषेक संस्कार सम्पन्न कराएंगे। तब बनारस के एक पंडित गागाभट्ट ने राज्याभिषेक कराने की सहमति दी मगर इसके लिए एक शर्त रखी कि वह हाथ से वीर शिवाजी को तिलक नहीं लगाएंगे, वह पैर के अंगूठे से तिलक लगाएंगे। वीर शिवाजी तैयार हो गए और उनका राज्याभिषेक हुआ। मगर उन्होंने सबका दिल जीत लिया। मगर इतिहास की इस घटना से मुझे क्षोभ है। तिलक हाथ से ही लगाना चाहिए था। मगर छत्रपति शिवाजी इतिहास में अमर हो गए।  छिमा बड़न को चाहिए, छोटेन को उतपात।  का रहिमन...

अपने पहले राजनैतिक घर में वापस लौटे पूर्व मंत्री प्रोफेसर शिवाकांत ओझा

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अपने पहले राजनैतिक घर में वापस लौटे पूर्व मंत्री प्रोफेसर शिवाकांत ओझा राहुल पांडे 'अविचल'  जब मैंने पहली बार वर्ष 1991 में जाना कि विधायक भी कोई पद होता है तब प्रोफेसर शिवाकांत ओझा हमारे क्षेत्र के विधायक बने थे। वर्ष 1993 का चुनाव हार गए थे। वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में इनको हमारे क्षेत्र पट्टी से हटाकर बीरापुर भेज दिया गया था। वर्ष 1996 के चुनाव में बीरापुर से विजयी रहे और कल्याण सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। स्वर्गीय कल्याण सिंह जी के बहुत करीबी नेता थे और राममंदिर आंदोलन में सक्रिय रहे। जब स्वर्गीय कल्याण सिंह जी ने स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी से मतभेद के चलते मुख्यमंत्री पद और भारतीय जनता पार्टी छोड़ी थी तो बीबीसी के संवाददाता ने स्वर्गीय कल्याण कल्याण सिंह जी से पूंछा कि अब बीजेपी से मुख्यमंत्री कौन बनेगा? इसपर स्वर्गीय कल्याण सिंह जी का जवाब था कि यह तो किसी पार्टी के हाई कमान या विधायक दल का निर्णय होता है। अतः इसपर टिप्पणी करना उचित नहीं है लेकिन बात योग्यता की हो तो भारतीय जनता पार्टी को प्रोफेसर शिवाकांत ओझा को मुख्यमंत्री बनाना चाहिए। उस समय त...

69,000 शिक्षक भर्ती : अवशेष शिक्षकों के विद्यालय आवंटन के सम्बंध में

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विशिष्ट बीटीसी 2004, 2007, 2008 और प्रशिक्षु शिक्षक चयन 2011 के सम्बन्ध में परीक्षा नियामक प्राधिकारी का पत्र

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परीक्षा नियामक प्राधिकारी प्रयागराज ने समस्त डायट प्राचार्य से ऐसे लोगों की सूचना मांगी है जिन्होंने कि विशिष्ट बीटीसी 2004, 2007, 2008 और प्रशिक्षु शिक्षक चयन 2011 के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है परंतु उनकी नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे लोगों को अगली भर्ती हेतु परीक्षा नियामक प्राधिकारी सूचित करना चाहते हैं। 

कल्याण बाबू ने पहना था काँटों का किरीट

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राहुल पाण्डेय 'अविचल' उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव वर्ष 1991 को भारतीय जनता पार्टी ने राममंदिर के मुद्दे पर लड़ा। चुनाव में विजयी होने के बाद मुख्यमंत्री का चयन करना भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद ने निर्णय लिया था कि जो मुख्यमंत्री बनेगा वह सर्वप्रथम मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस तरह मंदिर की राह में सबसे बड़ी अड़चन विवादित ढांचा था और उसे हटाना अनिवार्य था। इसके पूर्व भक्तों का जनसमूह उसे हटाने का प्रयास कर चुका था और तमाम रामभक्त बलिदान हो चुके थे। आरएसएस ने अटल बिहारी वाजपेयी को मुख्यमंत्री बनाना चाहा तो उन्होंने यह शर्त रखी कि फिर अगले पाँच वर्ष तक मंदिर मुद्दे को नहीं उठाया जाएगा और उन्हें पाँच वर्ष तक ईमानदारी से कार्य करने दिया जाएगा। आरएसएस इसके लिए तैयार नहीं हुआ और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी की ताजपोशी करना चाहा मगर जोशी जी इसके लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि यदि वह मुख्यमंत्री बनेंगे तो यह संदेश जाएगा कि बीजेपी के पास राज्य में कोई नेता नहीं है। इसके बाद जोशी जी ने कल्याण सिंह को मुख्यमंत...

संस्कृतसप्ताहसमापनसमारोहः

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संस्कृतभारतीकाशीप्रान्तस्य संस्कृतसप्ताहसमापनसमारोहः 25-08-2021 दिनाङ्के             सायं 7 वादने  अधोलिखित गूगललिंकमाध्यमेन भविष्यति https://meet.google.com/zec-wgvm-wfi

वर्तमान अफगान संकट और भारत का नजरिया

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राहुल पाण्डेय 'अविचल'  रूस को हटाने के लिए अमेरिका ने तालिबान जैसे लोगों की उपज की परिस्थिति को जन्म दिया था। रूस बाद में विखंडित हुआ। चेचेन्या विद्रोह के कारण रूस का काफी नुकसान हुआ। तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था। ओसामा बिन लादेन ने अलकायदा को अफगानिस्तान की जमीन से मजबूत किया। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमले में शामिल 19 लोगों में 15 लोग सऊदी अरब के थे। अमेरिका ने इराक और तालिबान को निशाना बनाया। उस कट्टर तालिबान को पाकिस्तान और सऊदी अरब सहित तीन देश मान्यता दे चुके थे। अमेरिका ने तालिबान को सत्ता से बेदखल किया। इतने लंबे संघर्ष में अमेरिका ने 2200 सैनिकों/नागरिकों को खोया। अफगानिस्तान में लोकतंत्र की स्थापना का प्रयास किया। हामिद करजई हो या अशरफ गनी ये दोनों अमेरिका की छत्रछाया में राष्ट्रपति बने। भारत ने 22 हजार करोड़ का अफगानिस्तान में निवेश किया। सड़क, संसद व अस्पताल का निर्माण कराया। अमेरिका के डेढ़ लाख सैनिकों ने अफगानिस्तान में मोर्चा संभाला था। तीन लाख अफगानिस्तान सैनिकों की भर्ती हुई। सब पैसा और धन के लालच में सेना में शामिल हुए। उनमें देश के प्रति क...