अपने पहले राजनैतिक घर में वापस लौटे पूर्व मंत्री प्रोफेसर शिवाकांत ओझा
जब मैंने पहली बार वर्ष 1991 में जाना कि विधायक भी कोई पद होता है तब प्रोफेसर शिवाकांत ओझा हमारे क्षेत्र के विधायक बने थे। वर्ष 1993 का चुनाव हार गए थे। वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में इनको हमारे क्षेत्र पट्टी से हटाकर बीरापुर भेज दिया गया था। वर्ष 1996 के चुनाव में बीरापुर से विजयी रहे और कल्याण सिंह सरकार में कैबिनेट मंत्री बने।
स्वर्गीय कल्याण सिंह जी के बहुत करीबी नेता थे और राममंदिर आंदोलन में सक्रिय रहे। जब स्वर्गीय कल्याण सिंह जी ने स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी से मतभेद के चलते मुख्यमंत्री पद और भारतीय जनता पार्टी छोड़ी थी तो बीबीसी के संवाददाता ने स्वर्गीय कल्याण कल्याण सिंह जी से पूंछा कि अब बीजेपी से मुख्यमंत्री कौन बनेगा? इसपर स्वर्गीय कल्याण सिंह जी का जवाब था कि यह तो किसी पार्टी के हाई कमान या विधायक दल का निर्णय होता है। अतः इसपर टिप्पणी करना उचित नहीं है लेकिन बात योग्यता की हो तो भारतीय जनता पार्टी को प्रोफेसर शिवाकांत ओझा को मुख्यमंत्री बनाना चाहिए। उस समय तब स्वर्गीय राम प्रकाश गुप्ता जी मुख्यमंत्री बने थे, उसके बाद श्री राजनाथ सिंह जी मुख्यमंत्री बने। वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा से बीरापुर से विधायक बने। वर्ष 2007 का चुनाव प्रोफेसर शिवाकांत ओझा बसपा के प्रत्यासी रामशिरोमणि शुक्ल से हार गए थे। वर्ष 2009 में प्रोफेसर शिवाकांत ओझा भाजपा छोड़कर बसपा से जुड़ गये और प्रतापगढ़ लोकसभा का चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे।
नए परिसीमन में बीरापुर शीट खत्म हो गयी थी उसका नाम रानीगंज हो गया। मैंने प्रोफेसर साहब के लालगंज आवास पर उनसे मुलाकात की और उनके राजनैतिक भविष्य के विषय में पूंछा तो उन्होंने बताया कि जल्द ही समाजवादी पार्टी से जुड़ जाऊंगा और रानीगंज से टिकट के लिए श्री मुलायम सिंह यादव जी से बात हुई है। उस समय प्रोफेसर ओझा ने अपनी गाड़ी से मुझे लालगंज से प्रतापगढ़ भी छोड़ा था। वर्ष 2012 का चुनाव प्रोफेसर शिवाकांत ओझा ने समाजवादी पार्टी से लड़ा और विजयी हुए। उनके पास एक बार फिर ऐसा दौर आया जब वह दोराहे खड़े हो गए। एक तरफ उन्हें सपा सरकार में मंत्री बनना था दूसरी तरफ बीजेपी में शामिल होंने का अवसर मिल रहा था। वह समाजवादी पार्टी की सरकार में मंत्री बन गए। वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ने का उन्हें भाजपा ने ऑफर किया मगर वह चूक गए अन्यथा भाजपा से वर्ष 2017 का चुनाव जीतकर मंत्री बनते। मगर उन्होंने सपा से ही चुनाव लड़ा और बीजेपी लहर में चुनाव हार गए। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने उनका टिकट काट दिया और वह आज नई दिल्ली में भाजपा में शामिल होकर राजनीति के अपने पहले घर में लौट आए।
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