कल्याण बाबू ने पहना था काँटों का किरीट

राहुल पाण्डेय 'अविचल'

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव वर्ष 1991 को भारतीय जनता पार्टी ने राममंदिर के मुद्दे पर लड़ा। चुनाव में विजयी होने के बाद मुख्यमंत्री का चयन करना भारतीय जनता पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण रहा। आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद ने निर्णय लिया था कि जो मुख्यमंत्री बनेगा वह सर्वप्रथम मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस तरह मंदिर की राह में सबसे बड़ी अड़चन विवादित ढांचा था और उसे हटाना अनिवार्य था। इसके पूर्व भक्तों का जनसमूह उसे हटाने का प्रयास कर चुका था और तमाम रामभक्त बलिदान हो चुके थे। आरएसएस ने अटल बिहारी वाजपेयी को मुख्यमंत्री बनाना चाहा तो उन्होंने यह शर्त रखी कि फिर अगले पाँच वर्ष तक मंदिर मुद्दे को नहीं उठाया जाएगा और उन्हें पाँच वर्ष तक ईमानदारी से कार्य करने दिया जाएगा। आरएसएस इसके लिए तैयार नहीं हुआ और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी की ताजपोशी करना चाहा मगर जोशी जी इसके लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि यदि वह मुख्यमंत्री बनेंगे तो यह संदेश जाएगा कि बीजेपी के पास राज्य में कोई नेता नहीं है। इसके बाद जोशी जी ने कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री बनाने का सुझाव दिया। कल्याण सिंह जोशी जी के अत्यंत प्रिय और करीबी थे। इस तरह दिनांक 24 जून वर्ष 1991 को कल्याण सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे एक मुकदमे में उन्होंने हलफनामा भी दिया कि वह विवादित ढांचे की सुरक्षा करेंगे। दिनांक 6 दिसंबर 1992 को रामलला के भक्तों ने विवादित ढांचा ढहा दिया। एक भी भक्त को खरोंच तक नहीं लगने पायी। मुख्यमंत्री ने अपना त्यागपत्र महामहिम राज्यपाल को सौंप दिया। मुख्यमंत्री का इस्तीफा स्वीकार होता इसके पहले ही प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने कल्याण सिंह सरकार समेत अन्य राज्यों की भी बीजेपी सरकार को बर्खास्त कर दिया। श्रीरामलला के नाम पर बनी सरकार ने श्रीरामलला के लिए कुर्सी का परित्याग कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना के कारण चौधरी कल्याण सिंह ने एक दिन जेल में भी बिताया। इस तरह उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में जो कार्य किया रामभक्त उनके आजीवन आभारी रहेंगे। एक बार जब उन्होंने बीजेपी से इस्तीफा दिया था तो पत्रकारों ने उनसे पूंछा कि क्या अब आपके एजेंडे से मंदिर मुद्दा खत्म हो चुका है तो उनका जवाब था कि मैं बीजेपी से अलग हुआ हूँ भगवान राम से अलग नहीं हुआ हूँ। राम मंदिर बनवाना मेरा प्रण है।

Comments

  1. यादगार कार्यकाल एवं प्रेरक जीवन रहा बाबूजी का ।

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