का रहिमन हरि को घट्यो, जो भृगु मारी लात।

इतिहास को बारीकी से पढ़ा जाए तो इतिहास में ब्राह्मणों को बहुत सम्मान मिला जबकि ब्राह्मणों ने कई जगह इतिहास के साथ क्रूर मजाक किया था। आज जिसे हम हिंदुओ का सबसे बड़ा आदर्श मानते हैं, ब्राह्मणों ने उनके साथ भी घिनौना कार्य किया था। मगर दूसरे अर्थों में देखा जाए तो उन्होंने फिर भी ब्राह्मणों का सम्मान किया। कभी किसी ब्राह्मण का अपमान नहीं किया। सबको साथ लेकर चलना बस उनके ही बस में था।   जब वीर शिवाजी का राज्याभिषेक होना था तो कोई भी ब्राह्मण राज्याभिषेक के लिए तैयार नहीं हुआ। मगर वीर शिवाजी ने कहा कि वह ब्राह्मण के हाथ से ही राज्याभिषेक संस्कार सम्पन्न कराएंगे। तब बनारस के एक पंडित गागाभट्ट ने राज्याभिषेक कराने की सहमति दी मगर इसके लिए एक शर्त रखी कि वह हाथ से वीर शिवाजी को तिलक नहीं लगाएंगे, वह पैर के अंगूठे से तिलक लगाएंगे। वीर शिवाजी तैयार हो गए और उनका राज्याभिषेक हुआ। मगर उन्होंने सबका दिल जीत लिया। मगर इतिहास की इस घटना से मुझे क्षोभ है। तिलक हाथ से ही लगाना चाहिए था। मगर छत्रपति शिवाजी इतिहास में अमर हो गए। 

छिमा बड़न को चाहिए, छोटेन को उतपात। 

का रहिमन हरि को घट्यो, जो भृगु मारी लात॥ 

जब भृगु ऋषि ने भगवान विष्णु को पैर से मारा तो भगवान विष्णु ऋषि भृगु का पैर सहलाने लगे कि ऋषि के पैर में चोट तो नहीं आई।

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