सूर्यकुमार यादव जातिवादी नहीं हैं

सूर्यकुमार यादव जातिवादी नहीं हैं, वह एक अच्छे क्रिकेटर हैं, जाति-पात से अलग हटकर उन्होंने एक मद्रासी से शादी किया।
मगर उनके समर्थकों ने उन्हें जाति के दायरे में बांध दिया है। सही मायने में वही सूर्यकुमार के दुश्मन हैं। 
पिछले 28 वर्ष से क्रिकेट देख रहा हूँ, मेरी जाति और समुदाय के अनेक लोगों ने क्रिकेट खेला मगर मैंने कभी भी उनका जाति के आधार पर समर्थन नहीं किया। 
मेरे सबसे पसंदीदा मुख्यमंत्री के जन्म के आधार पर जाति के लोग यदि अपराध में लीन हैं तो वह मेरे सबसे पसंदीदा मुख्यमंत्री के सबसे बड़े विरोधी हैं, वह हमारे सबसे पसंदीदा मुख्यमंत्री की छवि धूमिल कर रहे हैं। जबकि उन्हें अपराध से दूर होकर हमारे पसंदीदा मुख्यमंत्री का समर्थन करना चाहिए। उन्हें आगे बढ़ने का जिससे अवसर मिल सके। राजनाथ सिंह जी अटल/आडवाणी जी के बाद प्रधानमंत्री के सबसे बड़े दावेदार थे, मगर वह इस मुकाम पर क्यों नहीं पहुंचे इसपर उनके समर्थकों को मंथन करना चाहिए। 
लोकतंत्र कोई राजतंत्र नहीं है , लोकतंत्र में यदि आप अपने सबसे पसंदीदा नेता को सर्वोच्च पद पर देखना चाहते हैं तो आपको त्याग करना होगा। धैर्य रखना होगा, संसद में We Are Landlord कहने वाले प्रधानमंत्री ने अपनी जाति के लोगों पर अंकुश रखा। सामाजिक न्याय के प्रणेता को भले ही ओबीसी लोग अपनी जाति का न होने के कारण भूल गए। मगर उस प्रधानमंत्री के लिए कहा गया ' राजा नहीं फकीर है जनता की तकदीर है। ' इसके अतिरिक्त नेताओं को भी एक स्वतंत्र सेल बनाकर अपनी जाति के लोगों के विरुध्द आने वाली शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण करके सर्वोच्च पद पर पहुंचना होता है। क्योंकि भारत में जाति एक कड़वा सच है। जिस दिन तहसील से जाति प्रमाणपत्र बनना बंद हो जाये और मात्र गरीबी का प्रमाणपत्र बने तो सब समस्याओं का शायद समाधान हो जाये। (स्वतंत्र विचार)

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