राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के निर्णय का प्रभाव :

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के निर्णय का प्रभाव : 
जब दिनांक 25/11/2021 को माननीय जोधपुर उच्च न्यायालय ने राजेंद्र सिंह चोटिया केस में एनसीटीई का नोटिफिकेशन दिनांक 28/06/2018 को रद्द कर दिया था तो एनसीटीई पत्र जारी करके माननीय सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने तक आगे से बीएड की नियुक्ति रोक सकती थी। मगर न तो एनसीटीई ने कोई पत्र जारी किया और न ही उस आदेश को माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने पर माननीय जोधपुर उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगी। 
अन्य राज्यों में पटना उच्च न्यायालय ने उसके बाद भी भर्ती को जारी रहने दिया और नियुक्ति को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के आधीन कर दिया। 
जबलपुर हाई कोर्ट ने भी मध्य प्रदेश में भर्ती जारी रखी और नियुक्ति को अंतिम निर्णय के आधीन कर दिया। जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय के बाद इसपर अंतिम बहस शुरू हुई तो मध्य प्रदेश सरकार ने सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया को देवेश शर्मा केस में क्लारिफिकेशन के लिए उतार दिया है। जिससे कि क्लारिफिकेशन के बाद ही माननीय जबलपुर उच्च न्यायालय में बहस हो। मामला देवेश शर्मा ऑर्डर डेलिवर्ड बेंच में भेज दिया गया है।
कोलकाता हाई कोर्ट ने जोधपुर उच्च न्यायालय के फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय से रोक न होने के कारण भर्ती रोक दी थी। 
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद पटना उच्च न्यायालय ने नियुक्त बीएड को बाहर किया। 
बंगाल के बेरोजगारों ने बहुत प्रयास किया उनको कुछ न मिला। 
सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के पहले छत्तीसगढ़ में सिलेक्शन लिस्ट बन गई थी। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद छत्तीसगढ़ के चयनित बीटीसी ने चयनित बीएड को नियुक्ति न देने के लिए माननीय बिलासपुर उच्च न्यायालय की शरण ली और बीएड की नियुक्ति पर रोक लगी परंतु चयनित बीएड के लोग माननीय सर्वोच्च न्यायालय गए और प्रतिवादी न बनाने का हवाला देकर हाई कोर्ट की रोक हटवा दी। उनको नियुक्ति मिल गई लेकिन उनकी नियुक्ति पर माननीय बिलासपुर उच्च न्यायालय फैसला करेगी।
महाराष्ट्र में भी परीक्षा नहीं हो पाई थी।
उत्तर प्रदेश में भी नियुक्ति उच्च न्यायालय में चैलेंज है लेकिन सबकी नियुक्ति माननीय जोधपुर उच्च न्यायालय के फैसले के पहले ही हो चुकी है। 
इस तरह हर राज्य का अलग अलग मामला है। 
एनसीटीई योग्यता निर्धारित करने वाली सर्वोच्च शक्ति/संस्था है। सभी राज्यों पर उसका नोटिफिकेशन/गाइडलाइन एवम पत्र अनिवार्य रूप से लागू है। 
देश की कोई भी हाई कोर्ट उसपर/एनसीटीई के निर्णयों पर  कोई फैसला सुनाए तो तत्काल उसे/एनसीटीई को अमल में लाना चाहिए अन्यथा अन्य राज्यों में उसका असर पड़ता है। 
पदोन्नति मामले में एनसीटीई ने नोटिफिकेशन दिनांक 23/08/2010 की पैरा 4 की माननीय मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा व्याख्या होने पर दिनांक 11/09/2023 के पत्र/आरटीआई में उस फैसले का जिक्र करके स्थिति को स्पष्ट कर दिया। मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। 
यदि किसी ने माननीय जोधपुर उच्च न्यायालय के फैसले के बाद एनसीटीई से आरटीआई मांगा होता कि बीएड की नियुक्ति को लेकर माननीय जोधपुर उच्च न्यायालय के फैसले के बाद एनसीटीई का क्या कहना है तो एनसीटीई के जवाब से बीटीसी के लोग माननीय उच्च न्यायालय में आरटीआई/पत्र की प्रतिलिपि लगाकर बीएड की नियुक्ति न होने देते। मगर मैं बुनियादी तौर पर बीएड डिग्रीधारक होने के कारण ऐसी बातें उस समय न करता था। मुझे माननीय जोधपुर उच्च न्यायालय के फैसले में कोई कमी न दिखी थी इसलिए ईश्वर से प्रार्थना कर रहा था कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय से अंतिम निर्णय आने के पूर्व तक अधिक से अधिक बीएड की नियुक्ति हो जाए। 69000 भर्ती को आनन फानन में संपन्न कराने का प्रयास किया। मगर फिर भी एक अंक विवाद, रिविजिट विवाद शेष रह गए। बीएड की नियुक्ति वर्ष 1999 से हो रही है, सिर्फ छः महीने की ट्रेनिंग करके लोग बीटीसी के समकक्ष हो जाते हैं। आरटीई एक्ट के बाद भी आरटीई एक्ट सेक्शन 23(2) से लोग छः महीने की ट्रेनिंग करके बीटीसी के समकक्ष हुए हैं।
इस तरह जो भी बीएड की नियुक्ति दिनांक 28/06/2018 के बाद हुई है उसमें सिर्फ एनसीटीई का दोष है किसी शिक्षक/शिक्षिका का दोष नहीं है। 
एनसीटीई की गलती दिनांक 25/11/2021 को माननीय जोधपुर उच्च न्यायालय द्वारा पकड़ी गई। 
उसके बाद भी जो नियुक्ति हुई वह एनसीटीई की वजह से हुई। अतः हमारा प्रयास सर्वप्रथम दिनांक 25/11/2021 के बाद नियुक्त लोगों को बचाना है। जिससे उसके पूर्व एवम दिनांक 28/06/2018 के बाद के लोग स्वतः बच जाएं। सबका ब्रिज कोर्स भी कराया जायेगा एवम जरूरत पड़ी तो डीबीटीसी करा दी जाए पर सबकी नौकरी बचाना जीवन का एक उद्देश्य बन चुका है। बाकी विधिक रूप से यह सच है कि बीटीसी के रहते बीएड की नियुक्ति संभव नहीं थी। मगर जो मानक योग्य शिक्षक का राज्य सरकार ने बनाया था उसमें बीटीसी के लोग रिक्ति नहीं भर पाते थे। 
राहुल पांडे अविचल

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