एक दिवसीय धरने पर बैठे शिक्षक राजनीति के पुरोधा अभिमन्यु प्रसाद तिवारी
एक दिवसीय धरने पर बैठे शिक्षक राजनीति के पुरोधा अभिमन्यु प्रसाद तिवारी
राहुल पांडे 'अविचल'
उम्र का एक ऐसा पड़ाव जब किसी इंसान को अपने पैरों के बल चल पाने में तकलीफ होती है, इस उम्र में दूसरों के कदमों को मजबूत करने व बुढ़ापे का सहारा कही जाने वाली पुरानी पेंशन के लिए अस्सी वर्ष के अभिमन्यु प्रसाद तिवारी युवाओं के हित में लखनऊ के ईको गार्डन में एकदिवसीय धरने पर बैठ गए। उनकी जिजीविषा को देखकर प्रदेश भर से आये शिक्षकों ने दांतों तले उंगली दबा ली। अभिमन्यु प्रसाद तिवारी कई दशक तक उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रहे। उन्होंने शिक्षकों के हित में सदैव संघर्ष किया एवं युवाओं के भविष्य को लेकर हमेशा चिंतनशील रहे। उत्तर प्रदेश की कल्याण सिंह सरकार ने प्राथमिक शिक्षक के संवर्ग को मृत घोषित कर दिया तो अभिमन्यु प्रसाद तिवारी ने कहा कि संवर्ग मृत होने से भविष्य में कभी शिक्षक भर्ती नहीं होगी तो युवाओं का भविष्य चौपट हो जाएगा। युवाओं के हित में सड़क पर उतर गए और अंत में सरकार को झुकना पड़ गया था। जिसके परिणामस्वरूप शिक्षकों की भर्ती अनवरत होती आ रही है।
कई राज्यों में पुरानी पेंशन बहाल हो चुकी है। जिससे पुरानी पेंशन की मांग दिन प्रति दिन मजबूत होती जा रही है। अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर उत्तर प्रदेश में भी 31 मार्च 2005 के बाद नियुक्त सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन के दायरे में लाने की मांग को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय द्वारा आयोजित धरने में अभिमन्यु प्रसाद तिवारी भी बैठ गए। यह धरना संविदाकर्मियों को नियमित करने हेतु भी चल रहा था। अभिमन्यु प्रसाद तिवारी स्वयं पुरानी पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। वह चाहते तो आराम से घर बैठकर पेंशन लेते और किसी मांग में सम्मिलित न होते। मगर उन्होंने यह देखा कि वह स्वयं पेंशन पा रहे हैं मगर भविष्य में जब आज का कर्मचारी सेवानिवृत्त होकर पेंशन न पायेगा तो उसका जीवन कितना दुःखमय होगा। ऐसी ही सोच ने अनवरत उन्हें अतीत में लोकप्रिय बनाये रखा था। इसलिए उम्र के इस पड़ाव पर जब उन्हें कोई आक्षेप भी नहीं लगाएगा इसके बावजूद वह लोगों की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझकर मैदान में उतर गए। धरना स्थल पर देखा गया कि उन्हें कई बार पैर फैलाकर बैठना पड़ा, क्योंकि उम्र का यह पड़ाव आसान नहीं होता है। उन्हें सुनने व देखने के लिए ईको गार्डन में पूरा हुजूम उमड़ पड़ा था। अभिमन्यु प्रसाद तिवारी से युवाओं को प्रेरणा मिलती है कि जीवन में कुछ भी प्राप्त होगा तो संघर्ष करके ही प्राप्त होगा और संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए। भविष्य में एक लंबे संघर्ष के बाद ही पुरानी पेंशन बहाल हो सकेगी। इसलिए शिक्षक राजनीति के वयोवृद्ध नेता से प्रेरणा लेकर सफलता प्राप्त होने तक संघर्ष को कायम रखना होगा।
(लेखक एक शिक्षक, कवि, राजनैतिक विश्लेषक के साथ-साथ प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारी भी हैं।)
Comments
Post a Comment