नारायण नाम की महिमा
प्राचीन काल में कश्यप गोत्र का एक ब्राह्मण था, जिसका नाम था अजामिल। वह अत्यंत सदाचारी, वेदज्ञ और अपने माता-पिता का आज्ञाकारी पुत्र था। उसके जीवन में हर कार्य धर्मसम्मत और यथाविधि होता था। वह नित्य यज्ञ, दान, जप और तप में संलग्न रहता था। किंतु एक दिन उसका भाग्य उसे एक ऐसी दिशा में ले गया जहाँ से उसका पतन आरंभ हुआ। एक बार जब अजामिल वन में अपने पिता के लिए फल-फूल और कुशा आदि एकत्र करने गया, तब उसने वहाँ एक गणिका को एक पुरुष के साथ आलिंगन में देखा। यह दृश्य उसके मन में वासना का ज्वर जगा गया। उस दिन से उसकी दृष्टि धर्म से हटकर अधर्म की ओर मुड़ गई। वह उस स्त्री के मोह में इतना डूबा कि अपनी पत्नी, माता-पिता, गृहस्थ धर्म, सब कुछ त्यागकर उसी के साथ रहने लगा। समय बीतता गया। उस गणिका से उसे कई संतानें हुईं। उनमें सबसे छोटा पुत्र अत्यंत प्यारा था, जिसका नाम उसने रखा — नारायण। अजामिल का सारा स्नेह अब उसी छोटे पुत्र पर केंद्रित हो गया। वह दिन-रात उसी का नाम लेकर पुकारता — “नारायण आओ बेटा”, “नारायण खाओ”, “नारायण खेलो”…। उसके मुख से यह नाम बार-बार उच्चरित होता, पर वह यह नहीं जानता था कि यह...