एक रिश्ता ऐसा भी, सेकंड कजिन

एक रिश्ता ऐसा भी, सेकंड कजिन 
राहुल पांडे अविचल 
वास्तव में कजिन शब्द से तो सब परिचित हैं। कजिन के बच्चों के आपसी रिश्ते को सेकंड कजिन कहते हैं। सेकंड कजिन भी एक रोचक रिश्ता है। मैंने तो इस रिश्ते को बहुत करीब से जिया है। कोई सगा बड़ा भाई नहीं था। कजिन हमेशा मारने की साजिश किया करते थे। इसलिए एक सेकंड कजिन को सगे भाई जैसा सम्मान दिया। मै उम्र में छोटा था इसके बावजूद भी कभी कुछ नहीं मांगा। हमेशा सम्मान किया। जब बुरे वक्त से गुजर रहा था तब कुछ नहीं मांगा तो अब तो शायद जीवन बिना कुछ मांगे भी चल सकता है। सच यह है कि इस विषय पर मैं कुछ लिखना ही नहीं चाहता था। मैंने कुछ नहीं मांगा मुझे कुछ नहीं मिला। मगर उन्होंने जिंदगी में बस एक बार मुझसे कुछ मांगा मैंने वादा किया कि यह इच्छा पूरी हो जाएगी। ईश्वर ने मेरी लाज रखी ख्वाब पूरे हुए। मैं यह सोचता रहा कि अतीत में ऐतिहासिक सेकंड कजिन से जो गलती हुई थी वह गलती हमारे बीच ना हो। मै अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों में फिल्म निर्माता निर्देशक श्याम बेनेगल जी के जीवन से बहुत प्रभावित था। उनके जीवन के संघर्षों को पढ़ा करता था। फिल्म निर्माता बनने के उद्देश्य से वह मुंबई आए तो उनसे नौ वर्ष बड़े उनके सेकंड कजिन बॉलीवुड के महान निर्माता निर्देशक और अभिनेता थे। उन्होंने अपने बड़े भाई अर्थात सेकंड कजिन से मदद मांगी तो उन्होंने कहा कि तुमको यह सफर खुद पूरा करना होगा मैं तुम्हारी कोई सहायता नहीं करूंगा। श्याम बेनेगल जी ने संघर्ष किया और फिल्म निर्माता निर्देशक बनने का अपना सफर खुद पूरा किया। उनके जीवन में उनके सेकंड कजिन की कोई भी भूमिका नहीं रही। इसका परिणाम रहा कि श्याम बेनेगल जी के मन में सेकंड कजिन को लेकर अच्छा विचार नहीं रहा। इसके बावजूद भी वह सोचते थे कि साहब बीवी और गुलाम बनाने वाला उनका सेकंड कजिन अर्थात उनका भाई ही कागज के फूल बनाने का जोखिम ले सकता था। इन दोनों के रिश्तों की बेरुखी ने मुझे इस रिश्ते में प्रेरणा खोजने के लिए प्रेरित किया। जिसका परिणाम रहा कि मैंने अपने सेकंड कजिन के रिश्ते का निर्वहन किया।  वर्ष 2024 ने जाते-जाते मेरे प्रेरणाश्रोतों में से एक श्याम बेनेगल जी को भी हम लोग से छीन लिया। फिल्म निर्माता निर्देशक श्याम बेनेगल जी की दादी और फिल्म निर्माता निर्देशक और अभिनेता गुरुदत्त जी की नानी सगी बहन थीं। इसलिए यह दोनों आपस में सेकंड कजिन थे। इन दोनों के रिश्ते को जानने समझने की एक वजह यह भी रही कि मेरे दादा अर्थात मेरे बाबा ने जीवन में एकमात्र फिल्म देखी थी उस फिल्म का नाम प्यासा था। इसलिए उन्होंने अपने सबसे छोटे बेटे का नाम प्यासा फिल्म के अभिनेता के नाम पर गुरुदत्त रख दिया। अपने व्यक्तिगत जीवन में सेकंड कजिन के मामले में मेरी भूमिका फिल्म अभिनेता गुरुदत्त जी की नहीं है अपितु ईश्वर ने मुझे श्याम बेनेगल जी की भूमिका सौंपी थी। जिसका निर्वहन करने का मैंने पूरा प्रयास किया। इसलिए श्याम बेनेगल जी के निधन के बाद मैने सेकंड कजिन के रिश्ते पर विस्तार से चर्चा की। सेकंड कजिन तो दूर का रिश्ता है जिसे कि मैने सगे रिश्ते जैसा जिया। इसलिए इस विषय पर कुछ भी नकारात्मक नहीं लिखना चाहता हूं। मैं सेकंड कजिन से क्या उम्मीद रखता। मै सत्रह वर्ष पूर्व अज्ञातवास में रहता था कुछ दिन के लिए एक मित्र के यहां आया तो मेरे मित्र पूछते कि आप कब जा रहे हो। मै कहता कि चला जाऊंगा। एक दिन पैदल चलते हुए उन्होंने कहा कि एक फोन आ रहा है मै उठा रहा हूं आप कुछ न बोलना। मित्र ने फोन उठाया तो मेरे एक कजिन ने कहा कि राहुल कहां है।
मित्र ने कहा कि घर पर होंगे। तब मेरे कजिन ने कहा कि मेरे प्रति तनिक भी सम्मान हो तो घर से निकाल दो। मित्र ने फोन काटने के बाद कहा कि आपके प्रति आपके लोग कैसा सोचते हैं। सत्रह वर्ष बीत गया मैंने अपने कजिन से कभी भी नहीं पूछा कि आपने मेरे मित्र के घर से मुझे क्यों निकलवाना चाहा। मै तत्काल मित्र के घर लौटकर अपना बैग उठाया और चल दिया। मित्र ने बहुत रोका कि न जाइए। मै बस आपको सच से अवगत कराना चाहता था। मैं रुका नहीं और तेज गति से चल दिया। 
कजिन, सेकंड कजिन आदि से उम्मीद मै कैसे करता जब किशोरावस्था में प्रवेश करते ही पिता जी इस बेरहम दुनिया के हवाले करके साथ छोड़ दिया था। जहां पर मुझ जैसे भावनात्मक लोगों के लिए कोई भी जगह नहीं है। जीवन में संघर्ष करते करते एक ऐसा दौर आता है जब इंसान के जीवन में सुख आए कि दुख उसे कोई फर्क नहीं पड़ता है, उसे सुख और दुख में कुछ अंतर भी नहीं दिखता है।

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