भारत विभाजन के समय मुस्लिमों की विचारधारा

भारत विभाजन के समय देश में दो तरह के मुसलमान थे, एक वे थे जो गांधी जी के साथ भारत में रहना चाहते थे और दूसरे वे थे जिनका विचार था कि लड़कर लेंगे पाकिस्तान। 
जो वर्तमान में भारत में मुसलमान हैं इनके पूर्वज गांधी जी के साथ रहे। वे पाकिस्तान नहीं गए और भारत की मिट्टी में सुपुर्द ए खाक हुए। 
जो गैर मुस्लिम पाकिस्तान और वर्तमान बांग्लादेश में रह गए उनकी दशा बहुत खराब है। 
जबकि भारत में गांधी जी की विचारधारा के मुस्लिम को कहीं भी कोई दिक्कत नहीं है। 
लड़कर लेंगे पाकिस्तान की विचारधारा के मुस्लिमों ने जिस विचारधारा को जन्म दिया भले ही वह वर्तमान में पाकिस्तान और बांग्लादेश में रहते हैं मगर उनके कृत्यों के कारण भारत के गांधी जी की विचारधारा के मुस्लिमों को असहजता का सामना करना पड़ता है। 
बांग्लादेश में जो हिंदुओं के साथ हो रहा है भारतीय हिंदुओं में रोष है। गांधी जी की विचारधारा के मुस्लिम भी बांग्लादेशी मुस्लिमों की निंदा कर रहे हैं। 
महाकुंभ का पावन पर्व पूरी दुनिया में चर्चा का विषय है। आदरणीय महाराज जी ने भारत के धार्मिक गौरव की पताका को संपूर्ण विश्व में फहराने का पुनीत, ऐतिहासिक  और धार्मिक कार्य किया है। युगों युगों तक यह महाकुंभ याद किया जाएगा। 
वक्फ बोर्ड के जो लोग महाकुंभ की जमीन को अपना बता रहे हैं, वे भारत की गंगा जमुनी तहजीब में जहर घोलने का कार्य कर रहे हैं। 
लड़कर लेंगे पाकिस्तान की विचारधारा से प्रभावित न हों तो यह उनके लिए, साथ ही मुल्क की एकजुटता के लिए बेहतर होगा।

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