बीएड (अरनब घोष केस)

बीएड 

मैंने पहले ही बीएड के लोगों से कहा था कि अरनब घोष की याचिका खारिज हो जायेगी।
मगर देश के एक महान वकील को बीएड वालों ने उतारा था तो उनको अरनब घोष के लिए उतारना था जो कि बेरोजगार है। महान वकील हैं दिनांक ११/०८/२०२३ के पहले जारी हुए अधूरे विज्ञापन को पूरा करने की डिमांड करते। मगर बेवजह नियुक्त लोग के पक्ष में उतारकर बीएड वालों ने बीटीसी/डीबीटीसी वालों का मनोबल बढ़ा दिया। 
यूट्यूब वाले अब भी रट लगाए हैं कि ६९ हजार वाले राम शरण मौर्य केस से सर्वोच्च न्यायालय से एलाऊ हैं इसलिए बाहर नहीं होंगे। जबकि राम शरण मौर्य केस से मैं सहमत नहीं हूं। क्योंकि वह मुकदमा कट ऑफ का था और उसमें एनसीटीई के नोटिफिकेशन की वैधता पर सुनवाई नहीं हुई थी। उसमें एनसीटीई के नोटिफिकेशन के अनुपालन में बीएड को एलाऊ किया गया था। अब वह नोटिफिकेशन ही रद्द है। जिसको लगता है कि राम शरण में बीएड एलाऊ हैं तो वह रिविजिट में किसी बीएड को ६९००० के अंदर ला दें, १ अंक वाले माननीय सुप्रीम कोर्ट से जीते हैं। उसमें कोई बीएड वाले जो हों उनकी नियुक्ति दिला दे। जब कि अब बीएड की नियुक्ति प्राइमरी में संभव ही नहीं है। 
डॉक्टर साहब  की बहस देखकर लगा कि उन्होंने पटना उच्च न्यायालय के फैसले को पढ़ा है, वह न्यू मैटेरियल प्लेस करने का प्रयास कर रहे थे। मगर यह मैटेरियल देवेश शर्मा केस की फाइनल बहस में रखना था। अब देवेश शर्मा की केस के क्लारिफिकेशन/मोडिफिकेशन में  यह संभव नहीं है। 
यही हाल रहा तो फेसबुकिया, यूट्यूबर, बीएड नियुक्त के अज्ञानी नेतृत्वकर्ता नियुक्त बीएड को खा जायेंगे। 
जब सच बोलो तो ये हमसे भी उलझ जा रहे हैं।
कल की केस में नियुक्त बीएड का कोई मुद्दा नहीं था। अरनब एक बेरोजगार है , कोरोना के कारण उसकी भर्ती रुक गई थी। भर्ती शुरू हुई परीक्षा हुआ सब फाइनल होता उसी समय माननीय जोधपुर हाई कोर्ट ने एनसीटीई का नोटिफिकेशन रद्द कर दिया। उसी आधार पर माननीय कलकत्ता हाईकोर्ट ने प्रक्रिया रोक दी। माननीय सुप्रीम कोर्ट से देवेश शर्मा केस निर्णीत हुआ  माननीय जोधपुर उच्च न्यायालय का फैसला बहाल हुआ। दिनांक ११/०८/२०२३ को अन्य राज्य में चल रही  भर्ती रुक गई
अरनब घोष क्लारिफिकेशन/मोडिफिकेशन में गया रजिस्ट्री ने खारिज किया। फिर राजिस्ट्री के निर्णय को चुनौती दी। देवेश शर्मा केस की बेंच रिपीट हुई । 
मैंने बीएड वालों से कहा कि कोई भी नियुक्त बीएड इस मामले में अपनी बात न उठाना। सहयोग अरनब के वकील के लिए करना। मगर नियुक्त बीएड के लोग मेरी बात नहीं माने। अच्छा हुआ कि नियुक्त बीएड के लिए कोई कंटेशन माननीय न्यायमूर्ति श्री धुलिया जी ने नहीं लिखाया अन्यथा नियुक्त बीएड के लोग अपने विरुद्ध चल रहे तमाम मुकदमों में मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहते। 
दूसरी तरफ बंगाल जैसा बिहार का मामला था मगर पटना हाई कोर्ट ने देवेश शर्मा केस के निस्तारण तक बीएड की नियुक्ति करा दी और जब देवेश शर्मा केस निर्णीत हुआ तो पटना हाई कोर्ट ने छठे चरण के नियुक्त बीएड को बाहर कर दिया और उस पद पर बीटीसी (समकक्ष बीटीसी) के बचे आवेदकों को रखने का आदेश कर दिया। वो भी माननीय सर्वोच्च न्यायालय जायेंगे और माननीय न्यायमूर्ति श्री सुधांशु धूलिया जी की बेंच में मामला गया तो उनकी एसएलपी खारिज हो जायेगी।
मायावती जी को उनके जन्मदिन पर शिक्षामित्रों ने माला पहनाई थी। १३ वर्ष का दिन बीत गया। अनिल संत जी एनसीटीई से प्रशिक्षण की इजाजत लेकर आए और दो वर्ष का दूरस्थ बीटीसी का कोर्स कराने का निर्णय लिया। उसपर न्यायमूर्ति श्री कृष्ण मुरारी जी ने बीएड की याचिका पर स्थगन किया। मैं भी बीएड का पैरोकार था। 
दो जजों की खंडपीठ ने ट्रेनिंग से रोक हटा दी और ट्रेनिंग को एकलपीठ के निर्णय के आधीन कर दिया। सबकी ट्रेनिंग हो गई, विचार कीजिए वह दो वर्ष की ट्रेनिंग दी जो कि शिक्षामित्रों को बीटीसी के समकक्ष कर दिया। (दूसरी तरफ अभी हाल ही में जो एनआईओएस डीएलएड की ट्रेनिंग हुई वो १८ महीने की थी और माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उसे प्राइमरी के लिए अवैध बता दिया।)  मायावती सरकार २०१२ में गई न होती तो वह TET से सब शिक्षामित्रों को नियुक्त कर देती। अखिलेश सरकार में भी विभाग के मुखिया श्री नीतीश्वर कुमार जी ने विभागीय TET का प्रस्ताव दिया। मगर शिक्षामित्र नेताओं ने अस्वीकार कर दिया। समायोजन मामले में उनके विरुद्ध बहस में बीटीसी के बच्चों ने अच्छी बहस कराई थी ट्रेनिंग के विरुद्ध याचिका की कॉपी के लिए मोहमद अरशद जिसे मैं छोटा भाई की तरह मानता हूं घर तक आया। मगर मुझे पता था कि अब ट्रेनिंग रद्द नहीं होगी क्योंकि शिक्षामित्रों ने  योग्यता धारण कर ली है। 
समायोजन मुख्य न्यायमूर्ति डॉक्टर (श्री) धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ जी ने माननीय हाई कोर्ट में जब सीजे थे तब रद्द कर दिया था।
शिक्षामित्र माननीय सर्वोच्च न्यायालय गए, शिक्षामित्रों  ने गूगल से  सर्च करके टॉप टेन वकील हायर कर लिया था। 
मगर समायोजन रद्द हो गया। शिक्षामित्र के नेताओं ने उनको बरबाद किया।  अधिकारी महोदय लोग की चली होती तो शिक्षामित्र के साथ यह न होता। जबकि अनिल संत जी ने उनको अमृत पिलाया था। 
अब इस समय शिक्षामित्र RTE एक्ट सेक्शन २३(१) से कवर्ड हैं। वह बीटीसी के समकक्ष हैं। शिक्षक भर्ती परीक्षा की वजह से वह नौकरी नहीं पाए। 
शिक्षामित्र समायोजन के मामले में बीएड बीटीसी साथ था, शिक्षक भर्ती परीक्षा के कट ऑफ मामले में बीएड बीटीसी साथ था। मगर अब शिक्षामित्र बीटीसी एक हो गए हैं। 
नियुक्त बीएड के नेता अब उस दौर के शिक्षामित्रों की राह पर चल रहे हैं। जैसे वह जेठमलानी दादा की तीन से चार दिन की बहस को अपनी जीत बता रहे थे। वैसे बीएड वाले आज डॉक्टर साहब की बहस को अपनी जीत बता रहे हैं। नोटिफिकेशन रद्द हो चुका है, आरटीई एक्ट लगने के बाद और दिनांक २८/०६/२०१८ के पूर्व जो नियुक्त हैं  वह RTE एक्शन सेक्शन २३(२) से कवर्ड हैं, उनकी नियुक्ति आरटीई एक्ट सेक्शन २३(१) के लोगों की अनुपस्थिति में हुई है। 
अब भी वक्त है दिनांक २८/०६/२०१८ के बाद नियुक्त बीएड न संभले तो फिर कुछ न संभलेगा। 
मुझ जैसा निःशुल्क व्यक्ति पैसा देने पर भी इन लोग को सलाह देने के लिए नहीं मिलेगा। 
Rahul G. Pandey

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