राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या (PRAN) आवंटन एवं कटौती को लेकर असमंजस की स्थिति और समाधान

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में स्थायी  सेवानिवृत्ति खाता संख्या (PRAN) आवंटन एवं कटौती को लेकर असमंजस की स्थिति और समाधान 

राहुल पाण्डेय 'अविचल' 

भारत सरकार ने दिनांक 22 दिसंबर 2003 को अधिसूचना जारी करके दिनांक 1 जनवरी 2004 से सरकारी सेवा में आने वाले केंद्रीय कार्मिकों (सशस्त्र बलों को छोड़कर) के लिए पुरानी पेंशन की योजना बन्द कर दी। इस तरह जो दिनांक 31 दिसंबर 2003 तक नियुक्ति और चयन पा चुके थे वही पुरानी पेंशन के हकदार रह गए। केंद्र सरकार ने यह प्रणाली राज्यों के लिए बाध्यकारी नहीं किया परंतु राज्य सरकारें इसे अपने कर्मियों पर लागू कर सकती थीं। दिनांक 1 मई 2009 से स्वैच्छिक आधार पर असंगठित क्षेत्र के कामगारों सहित देश के सभी नागरिकों को यह सुविधा प्रदान की गयी। वर्ष 2011 में इनके लिए प्रोत्साहन हेतु प्रतिवर्ष न्यूनतम 1000 रूपये से अधिकतम 12000 रूपये तक अंशदान की व्यवस्था की गई थी। जो कि उस समय प्रोत्साहन राशि वित्तीय सत्र 2015-2016 तक थी।
इसमें निवेश के लिए दो टायर की व्यवस्था थी जिसमें पहले टायर को 60 वर्ष के बाद छोड़ा जा सकता है। सरकारी कार्मिकों को प्रतिमाह अपने वेतन का दस फीसदी अंशदान करना है और दस फीसदी अंशदान सरकार अपनी तरफ से करती है। सरकारी अंशदान को पूर्व वित्तमंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली ने 14 फीसदी कर दिया है। 
टायर 1- इस अकाउंट में जो भी पैसे जमा करवाए जाएंगे तय वक्त से पहले निकाले नहीं जा सकते । यह अकाउंट खुलवाने के लिए आपको टायर टू का अकाउंट होल्डर होना अनिवार्य नहीं है। जब आप स्कीम से बाहर हो जाएंगे तब ही इसके पैसे आप निकाल सकते हैं। इसमें सरकारी कर्मचारी, असंगठित क्षेत्र के कामगारों सहित देश के सभी नागरिक को निवेश करने का प्राविधान है। 
टायर 2- इस अकाउंट को खोलने के लिए आपको टायर वन का अकाउंट होल्डर होना अनिवार्य है। आप इसमें अपनी इच्छा के अनुसार पैसे जमा या निकाल सकते हैं। यह अकाउंट सभी को खुलवाना अनिवार्य नहीं है।
पेंशन प्रणाली के टियर-1 हेतु व्यक्ति सामान्यतः 60 वर्ष अथवा इसके बाद इसे छोड़ सकता है। छोड़ते समय व्यक्ति को अनिवार्यतः वार्षिकी खरीदने (आईआरडीए नियंत्रित जीवन बीमा कंपनी से) के लिए पेंशन राशि का 40 फीसदी निवेश करना आवश्यक होगा। सरकारी कर्मचारियों के मामले में वार्षिकी को सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी तथा उसपर आश्रित उसके माता-पिता तथा उसके पति/पत्नी के जीवन काल हेतु पेंशन की व्यवस्था करनी होगी। व्यक्ति को शेष 60 फीसदी एकमुश्त राशि कर रहित प्राप्त होगी। जिसका वह किसी तरह उपयोग करने हेतु स्वतंत्र होगा। व्यक्ति को 60 वर्ष की आयु से पूर्व पेंशन प्रणाली छोड़ने की छूट होगी। तथापि, इस मामले में अनिवार्य वार्षिकी 40 फीसदी की बजाय 80 फीसदी होगी।
उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए दिनांक 1 अप्रैल 2005 से राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (नवीन पेंशन योजना) लागू कर दिया। इस तरह राज्य सरकार की नौकरी में जो भी चयन अथवा नियुक्ति दिनांक 31 मार्च 2005 तक हुई वही पुरानी पेंशन के हकदार रह गए। दिनांक 1 अप्रैल 2005 से होने वाली नियुक्ति के कार्मिक एनपीएस के दायरे में आ गए। जब कार्मिकों की संख्या पर्याप्त हो गयी तो कार्मिकों द्वारा खुद को पुरानी पेंशन के दायरे में रखे जाने की मांग की जाने लगी। वर्ष 2016 के आंदोलन में डॉ० रामाशीष सिंह पुरानी पेंशन की मांग को लेकर शहीद हो गए। कर्मियों द्वारा स्थाई सेवानिवृत्ति खाता संख्या (PRAN) के आवंटन एवं एनपीएस कटौती का विरोध किया जाने लगा। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के क्रियान्वयन में आ रही कठिनाइयों के निवारण के संबंध में उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव ने दिनांक 23 अक्टूबर 2018 को आठ सदस्यीय समिति का गठन किया। यह समिति समुचित विचार-विमर्श कर अपनी आख्या प्रस्तुत करेगी। मुख्य सचिव ने आदेश किया कि ऐसी स्थिति में सभी पक्षों को प्रेरित करके अधिक से अधिक मात्रा में स्थायी सेवानिवृत्ति खाता संख्या (PRAN) आवंटित कराये जायं परंतु इस हेतु किसी कर्मचारी का वेतन न रोका जाय। 
बहराइच में कुछ परिषदीय शिक्षकों ने PRAN आवंटन के लिए आवेदन नहीं किया तो विभाग ने वेतन रोक दिया। याचिका संख्या सर्विस सिंगल 9336 ऑफ 2019 के आदेश में उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ पीठ ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बहराइच के आदेश पर मुख्य सचिव के आदेश का हवाला देकर रोक लगा दी। 
परिषदीय शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का PRAN आवंटन कराए जाने को लेकर दिनांक 21 नवंबर 2022 को वित्त नियंत्रक बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज ने सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं वित्त एवं लेखाधिकारी को पत्र लिखा। पत्र के अवलोक में PRAN आवंटन को लेकर सक्रियता बढ़ गयी। 
सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज ने दिनांक 28 नवंबर 2022 को समस्त जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं वित्त एवं लेखाधिकारी को आदेश किया कि दिनांक 1 अप्रैल 2005 अथवा उसके बाद जो भी कर्मचारी नियुक्त हैं जिसका PRAN आवंटित नहीं है, उनका PRAN आवंटित कराया जाए।
जो भी शिक्षक, अनुचर एवं लिपिक पुरानी पेंशन की उम्मीद में PRAN आवंटित नहीं करा रहे थे, सबमें उहापोह की स्थिति बन गयी। कुछ लोगों ने PRAN आवंटन के लिए आवेदन कर दिया तो कुछ लोग सोचने लगे कि वेतन रुकने पर न्यायालय की शरण लेंगे। 
सत्य यह है कि पुरानी पेंशन का विकल्प नवीन पेंशन योजना नहीं है। नवीन पेंशन योजना निवेश का विकल्प हो सकती है। सरकारी कर्मचारियों के लिए नवीन पेंशन योजना ऐसी स्थिति में बाध्यकारी है यदि राज्य ने इस कानून को लागू कर दिया है। कानून के तहत यह योजना सरकारी कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक नहीं है। राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (नवीन पेंशन योजना) असंगठित क्षेत्र के कर्मचारियों एवं देश के सभी नागरिकों (सरकारी कर्मचारियों को छोड़कर) के लिए स्वैच्छिक है। 
उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य सचिव ने दिनांक 16 दिसंबर 2022 को एक आदेश जारी किया है। आदेश की धारा 3 की उपधारा 5 में वर्णित है कि राज्य सरकार की सेवा में दिनांक 1 अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त कार्मिकों का वेतन आहरण संबंधित कार्मिकों को PRAN पंजीकरण के बिना न किया जाए। 
इस आदेश के बाद सभी विभाग अपने कार्मिकों के लिए स्थाई सेवानिवृत्ति खाता संख्या (PRAN) पंजीकरण के लिए अनिवार्य आदेश करेंगे और आदेश का पालन न करने पर वेतन रोक सकते हैं। विधिक रूप से मुख्य सचिव का आदेश खुद मुख्य सचिव ही रद्द कर सकते थे। इसलिए जो कर्मचारी न्यायालय की शरण लेंगे तो न्यायालय द्वारा मुख्य सचिव द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट आने तक के लिए अथवा मुख्य सचिव द्वारा अपना आदेश स्वतः निरस्त किये जाने तक के लिए अपर मुख्य सचिव के आदेश पर रोक लगाया जा सकता है। मगर रोक का लाभ उन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा जो PRAN के लिए पंजीकरण कर चुके होंगे। मगर निष्कर्ष यही है कि यदि पुरानी पेंशन बहाल नहीं होती है तो मुख्य सचिव द्वारा अपना आदेश निरस्त करने के बाद अथवा समिति की रिपोर्ट आने के बाद कर्मचारियों के लिए PRAN आवंटन के लिए पंजीकरण करना और वेतन से दस फीसदी धनराशि कटौती करवाना बाध्यकारी होगा। यह अलग बात है कि भविष्य में कर्मचारियों के धन को उनकी इच्छा के विरुद्ध बाजार में लगाने के मुद्दे पर न्यायालय द्वारा कोई आदेश हो जाये और एनपीएस कटौती न हो।  विदित हो कि कई राज्यों ने पुरानी पेंशन बहाल कर दिया है। ऐसी स्थिति में यह मुद्दा हमेशा चर्चा में बना रहेगा। 
(समस्त विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं।)

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