विवाह संस्था को नकारती विचारधारा को नकारते 'लिव इन रिलेशन'

विवाह संस्था को नकारती विचारधारा को नकारते 'लिव इन रिलेशन'
राहुल पांडे 'अविचल' 

विवाह पवित्र बंधन के रूप में देखा जाता था। भगवान शिव से लेकर भगवान विष्णु तक सबके सब विवाह बंधन में बंधे। भगवान राम और कृष्ण का भी विवाह हुआ। तारा, कुंती, अहिल्या, मंदोदरी और द्रोपदी का भी विवाह हुआ। वर्तमान समय में विवाह संस्था पर नकारात्मक टिप्पणियों का दौर शुरू हुआ है। स्वतंत्रता के लिहाज से विवाह को बाधा बताकर लोगों ने विवाह की निंदा करना प्रारंभ कर दिया। कई बुद्धिजीवियों ने व्यस्तता के कारण विवाह को अनुचित ठहराकर लिव इन रिलेशन को बेहतर बताया। मैंने कई बार लिव इन रिलेशन की समीक्षा की तो पाया कि भारत में इन पर कानून होना चाहिए। भारत में इसपर कोई कानून नहीं है। न्यायालय को विदेशी कानून के आधार पर कई बार निर्णय सुनाना पड़ा है। अभी तक सिर्फ लिव इन रिलेशन में जन्मी संतान को न्याय मिलता आ रहा है। रोहित शेखर जिसका उदाहरण हैं। सत्य यह है कि वह तो लिव इन रिलेशन की भी उपज नहीं थे। भूपेन हजारिका ने अपना जीवन ही लिव इन रिलेशन में बिता दिया। राजेश खन्ना अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर अनीता आडवाणी के साथ लिव इन रिलेशन में थे। अनीता ने डिम्पल कपाड़िया, ट्विंकल खन्ना और रिंकी खन्ना के ऊपर प्रताड़ना का मुकदमा भी दर्ज कराया था परन्तु लिव इन रिलेशन का कोई विधिक आधार न होने के कारण वाद खारिज हो गया था। मैं विवाह संस्था और लिव इन रिलेशन के मध्य कभी उलझना नहीं चाहा क्योंकि मैं जिस बात में दोनों पक्षों की खुशी हो, उसे ही सही मानता था। मगर लिव इन रिलेशन के पैरों तले कोई भी जमीन न होने को लेकर चिंतित रहता था और हमेशा इस विषय पर लिखता था कि नारी इसे सही मान रही है लेकिन कोई भी कानूनी जामा न होने के कारण वह ही प्रताड़ित होगी। मैंने श्रद्धा और आफताब केस पर कुछ नहीं लिखा। यहाँ तक कि किसी ख़बर को साझा या पसंद तक नहीं किया। आफताब पारसिक था या मुस्लिम इस पर भी चर्चा नहीं की। किसी धार्मिक एंगल पर लिखने से बचना भी चाहता हूँ। श्रद्धा के पिता आफताब के घर शादी का रिश्ता लेकर गए थे। मगर आफताब के घर वालों ने श्रद्धा के पिता को बेइज्जत किया था। शादी से साफ-साफ इंकार कर दिया था। श्रद्धा इसके बावजूद भी आफताब के साथ लिव इन रिलेशन में रहने लगी थी। विवाह संस्था को कोई कितना भी नकारे पर यह समीक्षा का विषय है कि नारी विवाह में अधिक सुरक्षित है कि लिव इन रिलेशन में अधिक सुरक्षित है। विवाह संस्था में अंतर्जातीय व अन्य धर्म में विवाह का एक कारण दहेज भी बन रहा था। दहेज प्रथा का अंत होना बेहद जरूरी है। श्रद्धा केस के बाद कई खबरें आई जिसमें अनेक श्रद्धा क्रूर आफताब द्वारा मारी गयीं। आज एक ख़बर पढ़ा कि पुरुष ने अपनी लिव इन रिलेशन में रहने वाली स्त्री से कहा कि आफताब ने तो पैंतीस टुकड़ा किया मैं तेरा चालीस टुकड़ा करूँगा। इस ख़बर ने मुझे इस विषय पर लिखने को मजबूर किया। मेरा मानना है कि लिव इन रिलेशन पर कानून बने। विवाह संस्था की कमियों को दूर किया जाए। बगैर कानून बने विवाह संस्था स्त्री सुरक्षा के मामले में लिव इन रिलेशन से बेहतर है। भारत में वेश्यावृत्ति पर भी कानून बनाना चाहिए। लिव इन रिलेशन, वेश्यावृत्ति और विवाह संस्था पर मैंने पूर्व में कई बार लिखे। स्त्री की सुरक्षा जिस भी तरह से हो सके उस पर सरकार, समाज और अदालत सभी को ध्यान आकृष्ट करना होगा। तुलसी बाबा ने लिखा है कि हित अनहित पशु पक्षिउ जाना। इस तरह तो हम सब इंसान हैं। अपना हित अनहित तो समझ ही सकते हैं। पुरुष के भावनात्मक जाल में फंसकर महिलाएं लिव इन रिलेशन में रहकर कहीं न कहीं अपना नुकसान कर रही हैं। मेरी बात का यह भी अर्थ नहीं है कि मैं विवाह संस्था की कमियों की अनदेखी कर रहा हूँ। मेरा सिर्फ इतना कहना है कि विवाह संस्था में अनगिनत कमियां हैं मगर देश में लिव इन रिलेशन पर जब तक कानून नहीं बनता है तब तक यह लिव इन रिलेशन बेहद ही ख़तरनाक है। जिसमें सिर्फ हत्या व विश्वासघात ही दिखेगा।

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