भारत विभाजन की विभीषिका और आजादी का जश्न

भारत विभाजन की विभीषिका और आजादी का जश्न 

- राहुल पांडे 'अविचल' 

           देश का जब विभाजन हुआ तो मुम्बई महानगर में पाकिस्तान से आये सिंधियों के लिए हमारे बाबा ने 2.5 हेक्टेयर जमीन दान कर दिया था। इतने बड़े दान की परिकल्पना भी वर्तमान में नहीं की जा सकती है। दान देना तो बहुत दूर की बात है। मुझे अपने बाबा-दादा पर गर्व है कि वह देश हित में समर्पित थे। 
           मौलाना अबुल कलाम आजाद जी विभाजन के पक्षधर नहीं थे। जब विभाजन की चर्चा सुने तो वह महात्मा गांधी जी के पास गए और किसी भी सम्भावित विभाजन को रोकने को कहा। महात्मा गांधी जी ने कहा कि हिंदुस्तान का विभाजन मेरी लाश पर होगा। मगर बाद में विभाजन हो गया तो जामा मस्जिद की प्राचीर से मौलाना अबुल कलाम आजाद ने बहुत भावुक भाषण दिया था। उन्होंने कहा कि जो चला गया उसे भूल जा हिन्द को अपनी जन्नत बना। उन्होंने कहा कि मुसलमान मूर्ख थे जो उन्होंने अलग मुल्क की मांग की और हिन्दू महामूर्ख थे जो उन्हें अलग मुल्क दे दिया। 
                जब पाकिस्तान से कटकर बांग्लादेश अलग देश बना तो उस समय पाकिस्तान के संस्थापक सदस्य रहे राजा महमूदाबाद मृत्यु शैया पर पड़े थे अर्थात किसी भी समय उनकी मृत्यु होने वाली थी। किसी ने आकर कान में कहा कि राजा साहब पाकिस्तान का विभाजन हो गया और एक नया देश बांग्लादेश बन गया। तब राजा महमूदाबाद ने कहा कि भारत से अलग होकर पाकिस्तान देश बनाना हमारी भूल थी। मजहब के नाम पर बने मुल्क की कोई मियाद नहीं होती है। काश! हम आज अपनी अंतिम सांस भारत में लेते। 
              भारत विभाजन के कुछ समय बाद ही मोहम्मद अली जिन्ना का निधन हो गया था। अर्थात बुद्धिमत्ता से भारत का विभाजन टाला भी जा सकता था। इस विभाजन से दुनिया की सबसे बड़ी आबादी अचानक शरणार्थी बन गयी थी। विभाजन की विभीषिका को कम करने के लिए देश के हर शरणार्थी को मुख्यधारा से जोड़ना होगा। हमें आपस में एक दूसरे पर विषवमन करने की बजाय मिलजुलकर एकजुटता बनाने की कोशिश करनी चाहिए। हम सभी भारतीय चाहे वह जिस धर्म के हों आपस में मिलजुलकर साथ रहें, तभी हम अपनी आजादी का असली जश्न मना पाएंगे। हमें आजादी के साथ विभाजन का जो जख्म मिला वह बेहद ही दुःखद व दुर्भाग्यपूर्ण था। वर्तमान पीढ़ी को अतीत से प्रेरणा लेकर अच्छी सोच के साथ आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए।

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